कोकण प्रांत के चिपळूण शहर में जनकल्याण समिती महाराष्ट्र प्रांत व्दारा नागालँड,मणिपूर के बालिकाओकां एक छात्रवास चलता है| रविवार दिनांक २१/१२/२०२५ को वार्षिकोत्सव की सुरुवात दीप प्रज्वलन से हुई| मंच पर विराजमान सन्माननीय व्यक्तियों का परिचय होने के बाद प्रकल्प प्रमुख सौ वृषालीताई खेरने छात्रा वास के बारे में संक्षेप में उपस्थित श्रोतागण को अवगत कराया|
बाद में छात्रावास की लडकीयो ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया| उस कार्यक्रम के अंतर्गत उन्होने मराठी भाषा की कोई गीत और नृत्य सादर किये तथा अपनी पूर्वांचल की भाषा मे चलने वाले नृत्य और गाने पेश किये|संघ के गीत, अपने छात्रावास के बारे में मनोगत और विचार, येशू के प्रति सद्भाव गीत, अंत में "जयोस्तुते...."हे गीत वंशी पर पेश किया|
प्रमुख अतिथी डॉक्टर वर्षा रिळकरजी का ये पहला अवसर था की किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उपस्थित रहना| उन्होने संबोधन करते समय संक्षेप में बताया की जनकल्याण समिती द्वारा ये जो प्रकल्प चल रहा हैं उसकी उन्हे कोई जानकारी नही थी | लडकियों का कार्यक्रम देख कर वे बहुत प्रभावित हो गई| लडकियो ने अपने मनोगत ने जो छात्रावास के कार्यकर्ता बंधू भगिनी का स्नेहभाव और नागरिक पालक व्यक्ती उनसे और कुटुंबसे जो स्नेह उनको मिला उसका शब्दांकन करना बहुत ही कठीन है| छात्रावासने निवास करने में उन्हे बहुत ही आनंद मिल रहा है और ये उनका दुसरा घर भी मानते है| छात्रावास की बालिकाओं के लीए कोई वैद्यकीय शिबिर आयोजित किया तो उस में उनका सहयोग रहेगा|
संघ के जिला कार्यवाह श्री विश्वास गोंधळेकर जीने संघके इस शताब्दी वर्ष की उप लक्ष में पंच परिवर्तन का महत्व और समाज में उसकी उपयोगिता इसका विवरण बहुत अच्छे तरीके से सबके सामने रखा|
समारोप का दायित्व माननीय श्री परागजी कंगलेने बहूत अच्छे तरीके से निभाया अपने संबोधन में इस छात्रवास गये २३ साल का लेखाजोखा सबके सामने रख दिया| संघ और संघ की विचारधारा से जो अलग अलग संस्थाये पूर्वांचल में काम कर रही है इसका परिणाम अभी हमे देखने को मिल रहा है|
आजादी के बाद भारतीय लोगोंने पूर्वांचल अपना है ऐसा कभी माना नही| इसका फायदा पश्चिमी देशोने बहुत उठाया| उधर जाने के लिए हम लोग तयार नही थे इसलिये पूर्वांचल के निवासी लोग भारत से अलगता की भावना से व्यवहार करते थे| संघ और संघ परिवार के अथक परिश्रम से आज स्थिती में अभी बदलावा आया है और हमारा अच्छी तरह से स्वागत हो रहा है| इतना ही नही हम लोग अगर शाकाहारी भोजन स्वीकार करते है तो वो भी हमे अच्छी तरह से शुद्ध स्वरूप में मिल जाता है|
ज्येष्ठ प्रचारक भैय्याजी काणेजी को पहले ५ छात्र महाराष्ट्र में लाने के लिए अपना भांजा उनके पास रखना पडा था| बहुतेक कठीण दौड से ये सब यात्रा हमे देखने को मिल रही है इसमे दान जाता उनका भी बहुत अच्छा योगदान मिल रहा है और मिलता जायेगा तो सभी से प्रार्थना है कि जो जिसका दान कर सकता है उसका स्वागत किया जायेगा कोई व्यक्ती अपना समय का योगदान पूर्वांचल के लीए देंगे कोई धन इक्कठा कर देंगे, कोई उधर सामग्री लगती है उसकी व्यवस्था करेंगे ऐसे किसी भी योगदान के लिए समाज हमारे साथ आना चाहिए|
छात्रावास की अध्यक्ष डॉ. सौ.आदितीजी थत्ते ने आभार प्रदर्शन किया| छात्रावास की लडकियो ने पूर्ण वंदे मातरम का गान कीया|
नाश्ता और कॉफीपान की व्यवस्था की गई थी|